Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 152, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 152, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 152 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ततो दुःखमजानन्तौ चिरमाश्वसितौ मिथः ।
शान्तौ विदितवेद्यत्समौ सर्वार्थनिस्पृहौ ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
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