Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 153, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 153, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 153 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
इत्यनेन प्रकारेण गुरुस्तस्य भविष्यसि ।
तेन तात मयोक्तोऽसि गिरा व्याधगुरो इति ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे व्याधमहागुरो (५) इस
प्रकार दुश्यमान आज के हम लोगों के स्वप्न से भी जाग्रत् के नाम से प्रसिद्ध सर्गरूपी स्वप्न निर्मल
चैतन्यमात्रस्वरूप है यानी स्वप्न के बराबर भी उसका अस्तित्व नहीं है । हे कमलनयन (77)) इस विषय
में आप उपपत्ति सुनिये