Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 154, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 154, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 154 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
यह जगत् समुद्र के फेन
की तरह चिद्रूप सागर का फेन है । इसका नवीन स्फुरण क्या होगा ? यह अनन्त चिद्घन परमात्मा
स्फुरणस्वभाववाला ही स्थित है