Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 154, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 154, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 154 · श्लोक 24
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हिन्दी अर्थ
शुद्ध चिन्मात्र-स्फुरण वृद्धि को प्राप्त चिद्घन ब्रह्म ही इस
जगत् के समान अवभासित होता है, ऐसी अवस्था में कहाँ दृश्य है और कहाँ द्रष्ट्रता है