Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 155, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 155, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 155 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तपः कुर्वन्कदाचित्स पुनः पप्रच्छ तं मुनिम् ।
कदा स्यादात्मविश्रान्तिर्ममेत्याह मुनिस्ततः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिजी ने कहा : हे व्याध, जैसा तुम
कहते हो वैसा ही यह सब परस्पर स्वप्न के समान स्थित है। यह अपने में सत् तथा अन्य लोगों मेँ असत्
प्रतीत होता है, क्योकि वैसा ही इसका सबको अनुभव होता है