Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 155, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 155, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 155 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
संस्तुतानवबुद्धात्मा ज्ञानसारतयानया ।
दोलायमानसंवित्त्वं न मूर्खो न च पण्डितः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे व्याध, प्रकृष्ट बोधवाले यद्यपि इस प्रकार तुम
पूर्णरूप से बोधित हुए हो तथापि तुम्हारी बुद्धि स्वाभिमत जगत्सत्यत्वभ्रम में ही विश्राम को प्राप्त हुई हे,
परमपद में क्षण-भर भी विश्राम को प्राप्त नहीं हुई