Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मन्त्री वदिष्यति ।
एषा हि ज्ञप्तिरास्तेऽन्तः सर्वस्य हृदये सदा ।
संविद्रूपा भगवती सैव प्रोक्ता सरस्वती ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे परमेश्वर, इस प्रकार आकाश सहित इस असीम दृश्य का अन्त
मुझे प्राप्त हो, यही परम वर मुझे मिले