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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

येन येन यथात्मीया प्रार्थ्यते स्वयमेव सा । प्रयच्छति तथैवाशु तस्माच्चिदनुभूयते ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सज्जन, ऐसी जब तुम प्रार्थना करोगे तब देवाधिदेव प्रभु ऐसा ही हो यों तुम्हें वर देकर अन्तर्धान हो जायेंगे