Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
न प्रार्थितैषा भवता मोक्षार्थमरिमर्दन ।
प्रार्थितैव त्वया संविदात्मीया शत्रुशान्तये ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वर्गाधिपति देवाधिदेव श्रीब्रह्माजी के
देवताओं के साथ चले जानेपर तपस्या से कृश हुआ तुम्हारा शरीर चन्द्रमा के समान कान्तिमान् हो
जायेगा