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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 46

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

ऐसा विचारकर तुम प्राणवायु को शरीर से बाहर निकालने वाली योगधारणा कर जैसे पक्षी खाये हुए फल से बचे हुए नीरस छिलका, गुठली आदि हिस्से का त्याग करता है वैसे ही उस शरीर का त्याग करोगे