Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 158, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 158 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
उद्वेगादथ बद्ध्वासौ प्राणरेचनधारणाम् ।
प्राणांस्तत्याज नभसि शवीभूतमधोवपुः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
सिन्धु
कहेगा : हे महाभाग ! तामस-तामस क्या कहा जाता है ? यह कृपया मुझसे कहिये । परमपद में ये
संज्ञे पहले की ही किसने ?