Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
प्रबोध्यमानोऽपि मया भूयोभूयस्ततस्ततः ।
न पपात पुरोदृश्ये परं निर्वाणमागतः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर बार-बार मने उसे इधर-उधर से जगाया, लेकिन परम निर्वाणपद को
प्राप्त वह फिर शब्दादि विषयों की ओर न गिरा