Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
कथयत्येवमप्येवं स विद्याधरनायकः ।
आसीत्संशान्तसंवित्तिः समाधिपरिणामवान् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्डजी ने कहा : हे मुने, मैं यों कह ही रहा था कि उस विद्याधर नायक का समस्त दृश्यज्ञान
शान्त हो गया नीर क्षीर के समान समाधिरूपी चित्त के परिणाम से युक्त हो गया यानी समाधि में
लीन हो गया
सर्ग सन्दर्भ
पन्द्रहवाँ सर्ग समाप्त सोलहवाँ सर्ग इस उपदेश को सुनकर विद्याधर की समाधि मं लीनता तथा अनहंभाव की प्रशंसा द्वारा कथा की समाप्ति का वर्णन ।