Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अत उक्तं मया राम यदि शुद्धे हि चेतसि ।
उपदेशः प्रसरति तैलबिन्दुरिवाम्भसि ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
अब महाराज करिष्ठजी अपने एवोक्त अर्थ में विद्याधर के चित्त का उदाहरण देकर वर्णन
में शीघ्रता होने के कारण भ्रुशुण्डजी की उक्ति को छोड़ करके भगवान् श्रीरमचन्द्रजी के प्रति
कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, इसीलिए पहले मैंने आपसे कहा था कि शुद्ध चित्त में उपदेश ऐसे फैलता
है, जैसे कि जल में तैलबिन्दु