Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
नाहमित्यस्ति ते नान्तर्मैनं भावय शान्तये ।
एतावदुपदेशोक्तिः परमा नेतरास्ति हि ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
वह कौन-सा उपदेश है 2 यह पूछने पर उको कहते हैं /
हे श्रीरामजी, आपके चिदेकरस प्रत्यगात्मा में अहंकार का अंश बिलकुल नहीं है, अतः आप
अपनी शान्ति के लिए असद्रूप इसकी भावना कभी मत कीजिये, बस यही मेरी सर्वोत्तम
सारसंग्रहभूत उपदेश वाणी है और कुछ अन्य नहीं