Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
एषैवाभव्यमनसि पतिता प्रविलीयते ।
उत्ताने मसृणादर्शे मुक्ताफलमिवामलम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
यही अभव्य पुरुष के चित्त में पड़कर
ऐसे नहीं ठहर पाती, जैसे कि उलटे चिकने साफ दर्पण में निर्मल मुक्ताफल नहीं ठहर
पाता