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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अहमादौ ममेत्यन्तस्तत इच्छा प्रवर्तते । इदमर्थशतानर्थकारिणी भवभारिणी ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

उसीको बतला रहे हैं बीजावस्था के स्थान में तो अहंभाव, इसके कार्यभूत वृक्ष के स्थान में ममभाव (यह मेरा है, यह भाव) तथा इस वृक्ष की शाखाओं के स्थान में इच्छा प्रवृत्त होती है, जो कि इदमर्थरूप अनेक अनर्थों तथा संसार को प्रदान करनेवाली है