Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 16, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 16, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
एवंविधा मुनिश्रेष्ठ मूढा अपि चिरायुषः ।
भवन्त्यनियमो ह्यङ्ग दीर्घायुष्यस्य कारणम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अनुसरण करते हुए महाराज वस्निष्ठजी विद्याधर की कथा का उपर्स्नहार करते हैं /
हे मुनिश्रेष्ठ, इस तरह मूढ भी कभी-कभी चिरंजीवी होते हैं, अत: दीर्घायु का कारण तत्त्वज्ञान
है, यह कोई नियम नहीं है