Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
विचित्रवर्णा विगुणा शून्ये च वितताकृतिः ।
जडस्पन्दोत्पातमयी शक्रचापलतेव खे ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम्हारा उक्त वृत्तान्त स्वप्न की
तरह, सारा का सारा मनोरथो द्वारा निर्मित-सा ओर परलोक में अनुभूत अर्थ के कथाप्रवाह में पतित
अर्थ के तुल्य निष्फल हे