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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

सर्वर्तुपुष्पफलपल्लवपूरवन्ति लीलाविलोलललनाकुलितालयानि । संकल्पमात्ररचनेन च सर्वकालं संपन्नसर्वविभवोत्करसंकुलानि ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : जब विपश्चित्‌ यह कहकर वहाँ पर क्षणभर चुप हुआ तब श्लाघ्यमति श्रीरामचन्द्रजी ने उससे यह कहा