Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
तानि संकल्पजालानि किल कल्याणकारतः ।
स्थिराणां मनसां भित्तिः कथमेवं भवेत्तु सा ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
शवबुद्धि से तुमने मेरा जो यह तिरस्कार किया है इस कारण मेरे शाप से उस पृथिवी को तुम शीघ्र
प्राप्त होओगे