Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
जीवस्त्यजति यद्भावे एकां देहमयीं धियम् ।
तद्भावैकमयीमन्यामाशु तत्रैव पश्यति ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
अहा ! मन को मोह में डालनेवाली माया अति विषम हे । जिसके कारण विधिर्यो ओर
निषेध दोनों एक जगह स्थिति को प्राप्त हुए