Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 161, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 161, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 161 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
ईदृशाः प्रतिभावर्ताः परमात्ममहाम्बुधौ ।
अनारतं प्रवर्तन्ते स्वतः स्वात्मनि खात्मकाः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
सायंकाल की सूचना देनेवाली दुन्दुभिध्वनि
सन्तुष्ट हुई दसों दिशाओं से की गई जयजयकार ध्वनि की तरह दिशाओं को पूर्ण करती हुई
उठी