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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 161, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 161, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 161 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

यथा स्पन्दात्मनो वायोरजस्रं स्पन्दलेखिकाः । उद्यन्त्येव सतश्चित्त्वाच्चिद्व्योम्नि प्रतिभायुताः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज दशरथ विपश्चित्‌ के लिए राज्य के अनुरूप क्रमश: घर, गृहस्थी, धन आदि का समर्थन करते हुए आसन से उठे