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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 161, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 161, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 161 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

या यथा स्वाङ्गभूतास्मादुदिता प्रतिभा प्रभा । तावत्सेह तथैवास्ते न हता यावदन्यया ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज दशरथ, श्रीरामन्द्रजी, महामुनि श्रीवसिष्ठजी आदि गणमान्य पुरुष आपस में एक दूसरे को क्रमानुसार विदाकर, नमस्कार आदि से सत्कार कर अपने अपने घरों को गये