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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 163, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 163, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 163 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

चित्तमिन्द्रियसेनाया नायकं तज्जयाज्जयः । उपानद्गूढपादस्य ननु चर्मावृतैव भूः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा कैसे ? ऐसा कोई कटे तो इस पर कहते है । चूँकि तत्त्वज्ञानी केवल अन्तर्दृष्टि हैं और अज्ञानी केवल बाह्यदृष्टि हे, अतएव उन दोनों की बुद्धिवृत्ति में स्थित प्रपंचस्वरूप को ये दोनों स्वयं समझने तथा तुमको अथवा आपस में एक दूसरे को समझाने के लिए समर्थ नहीं हो सकते हैं