Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 24
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी,
स्वप्नसंवेदनमात्रस्वरूपवाला चिदात्मा स्वप्न में जो जो राज्यादि वैभव होकर प्रतिष्ठित होता हे, वह
सब चित् का ही रूप है क्योकि वह रूप कर्ता, कर्म, करण आदि कारणों से निरपेक्ष होने से चिद्रूप ही
है