Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 56
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हिन्दी अर्थ
हमारे कुल में हमारे पुरखो ने तप और कर्म में ही निष्ठा उपार्जित की, ब्रह्मनिष्ठा का उन्होने
उपार्जन नहीं किया। हमारे पूर्वज कर्ममीमांसक थे हमारे पूर्वज तार्किक थे, हमारे पूर्वज साख्य थे, हमारे
पूर्वज तान्त्रिक थे, मन्त्रसिद्ध, योगसिद्ध तथा ओषध और रसायन में सिद्धहस्त थे, हम लोग भी उनके
वंशज हैं, अतः उनके अनुसृत मार्ग का ही अवलम्बन करेंगे, अध्यात्ममार्ग का अवलम्बन नहीं करेंगे ऐसा
कह रहे जनों का उपहास करते हुए श्रीवस्रिष्ठजी मुमुक्षुओं की उस मार्ग में प्रवृत्ति का निवारण करते हैं ।
यह हमारे पूर्वजों का कुआँ है अतः हम इसी का खारा जल पीएँगे यों कह रहे पुरुष निकटवर्ती
जाह्नवी (गंगा) के स्वच्छ जल का निरादर कर खारा जल पीते हैं वैसे ही आप भी अज्ञता की प्राप्ति के
लिए यानी पुनः पुनः जन्मपरम्पराओं के हेतुभूत एकमात्र मूर्खता के ही लाभ के लिए निरन्तर विरुद्ध
विविध विचारवाले मत होइये