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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 166, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 166, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 166 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यथा यथा यदा ये ये चिन्मात्रव्योमभास्वतः । चिदंशवः कचन्त्यच्छास्तदा ते ते तथा तथा ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे आज के स्वप्न पदार्थ कल के स्वप्न में असत्‌ ही हैँ लेकिन आज के जाग्रत्पदार्थ कल के जाग्रत्‌ में रहते हैं यों जाग्रत्‌ और स्वप्न में वैधर्म्य है ही इस आशंका का अन्यान्य जन्मों में जाग्रतूपदार्थो की अनुवृत्ति के अदर्शन द्वारा परिहार करते हैं। जाग्रद्रप स्वप्नसमय में जीवित पुरुष को-मृत्यु हुए बिना मरने के उपरान्त दिखाई देनेवाले दृश्यों का अभाव होने से परलोकरूप जाग्रत्‌ तनिक भी नहीं दिखाई देता, इसलिए आज के जाग्रत्‌ के पदार्थो की कल के जाग्रत्‌ में अनुवृत्ति नहीं दिखाई देती यह सिद्ध हुआ, इसलिए जाग्रत्‌ में उक्त वैधर्म्य भी नहीं है