Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 167, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 167, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 167 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

सारम्भमप्यनारम्भं संकल्पनगरं यथा । आकाशमात्रं भ्रान्त्यात्म स्वप्नस्त्रीसंगमोपमम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसी परिस्थिति में आपकी अभिमत वे अख्याति आदि मेरी आत्मख्याति की विभूतियाँ ही है, ऐसा कहते हैं । आत्मख्याति, अख्याति और अन्यथाख्याति ये सब चित्‌चमत्काररूप होने से मेरी आत्मख्याति की विभूतियाँ ही है