Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 169, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

सदेहा व्यवहारस्था अपि सुप्ता इवोत्तमाः । प्रक्षीणा इव लक्ष्यन्ते जडाभा न तु ते जडाः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

साकारअध्यास में वृक्ष आदि से चित्‌ में यह विशेषता है कि साकार में वे सव साकारअध्यास हैं लेकिन निराकार चित्‌ मे साकार जगत्‌ का अध्यास है, इस आशय से कहते हैं। जैसे आकारवान्‌ वृक्ष में यह शाखादिकल्पना की गई है वैसे ही निराकार चित्‌ में यह जगत्रूप कल्पना की गई है