Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 169, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 47

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अध्यवसाय (निश्चय) प्रधान होने से यही बुद्धि हे, यही चित्त हे, यही काल है, यही आकाश है, यही मैं हूँ, यही क्रिया हे, यही पंचतन्नमात्राएँ हैं