Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 169, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 59
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में पूर्णमदः पूर्णमिदम्“ इस श्रुति का स्मरण कराते है।
पूर्ण ब्रह्म से पूर्ण भी अनुद्धृत भी उद्धृत सा यह परमात्मरूप भी भान, जो भावरूप ही है, भासित
होता है, स्फुरित होता हे