Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 170, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 170, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 170 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
आह्लादकमनिन्द्याभिः कथाभिरिव नागरम् ।
सच्चेष्टामणिमाणिक्यभाण्डसंभारमन्दिरम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस
महापुरुष ने विश्रामशून्य निराधार ओर लम्बे संसाररूपी मार्ग में चिन्मात्र के दर्शन से आत्मा में विश्राम
पा लिया, वह सर्वश्रेष्ठ है, सर्ववन्दनीय हे