Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 171, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 171, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 171 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
रागद्वेषादयो भावा भावाभावदृशस्तथा ।
एतद्रूपममुञ्चन्त एतस्यावयवाः स्थिताः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिवर, उसके इस मित्र के स्त्री, पुत्र आदि पोष्यवर्ग कौन हैं और उनके
केसे गुण हैँ ? यह मुझसे संक्षेपतः ही कहने की कृपा कीजिये