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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 171, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 171, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 171 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यथा सुषुप्तात्स्वप्नत्वं गच्छद्यात्यनवस्थितिम् । चिन्मात्रमजहत्स्वच्छं निजं रूपमनामयम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

नित्य लाड़ करने में निरत, पालन करने में सर्वथा कटिबद्ध वह सकल संकटों की प्राप्ति होने पर रक्षा करने में सदा कमर कसकर तैयार रहता है