Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 172, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 172, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 172 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
न मोक्षोपायकथनं न च जानामि तत्स्थितिम् ।
संदेहादिव जिज्ञासुस्तावन्मोक्षकथोच्यते ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
अहो ! यह दुश्यमण्डल उसकी प्रभा से भासित होता है । वह सब चन्द्रमा,
सूर्य, अग्नि आदि पदार्थो का प्रदीपक (भासक) हे