Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 172, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 172, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 172 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
यावद्दृश्यं स्मृतिश्चैव संस्मृतिश्चास्य शाम्यति ।
अविद्यायास्तु मौर्ख्यस्य विमोहस्यात्यसंभवात् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह साकार है, निराकार है इस तरह की
शब्दार्थ-कल्पना, जो आकाश कुसुम के समान असद्रूप है, तत्त्वज्ञानियों को नहीं होती