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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 172, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 172, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 172 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यदि वापि भवेत्किंचित्स्मृत्या देहादि तस्य तत् । तदपृथ्व्यादिभिः शान्तं संकल्पनगरं तनु ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

तब प्रत्यक्षतः द्ष्टिगोचर हो रहे जगत्‌ की क्या गति होगी ? इस प्रश्न पर कहते हैं। जो यह चारों ओर स्थित “दृश्य” नामका कुछ प्रतीत होता है, स्फुरित होता है, श्रुतियों के तात्पर्य को जाननेवाले पुरुष उसे चिन्मात्र निर्मल आकाशरूप परम पद ही जानते हैं