Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 172, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 172, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 172 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
न भवत्येव मुक्तानां स्मृतिर्देहोदयः पुनः ।
न देशकालावर्तत्वमावर्तानां सतामिव ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे यह सिद्ध हुआ कि यह मूर्तं जगत् वन्ध्यापुत्र की नाई उत्पन्न ही
नहीं हुआ, अतः दृश्यबुद्धि सर्वथा नहीं है । सृष्टि-श्रुतियों का तात्पर्य अनुत्पत्ति का प्रतिपादन करने
में ही है, यह अर्थ है