Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 174, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 174 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
न तत्र नानाऽनाना न न च किंचिन्न किंचन ।
समस्तसदसद्भावसीमान्तः स उदाहृतः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह आदिम प्रजापति निराकार निर्विकार तथा चिन्मात्रस्वरूप
संकल्पनगर के तुल्य कारणविहीन हे