Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 175, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 175, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 175 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

वार्यावर्त इवाभाति पवनस्पन्दवच्च यत् । अबुद्धिपूर्वं चिद्व्योम्नि जगद्भानमभित्तिमत् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

वाचारम्भण श्रुति द्वारा प्रदर्शित न्याय से पर्यालोचना करने पर मृत्तिका, तन्तु आदि से अतिरिक्त घट, पट, आदि का अदर्शन होने से उनके विषय में स्वप्न जगतों की तरह अपनी यह भ्रान्ति प्रत्यक्ष ही अनुभूत होती हे । प्रत्यक्षानुभव की अपेक्षा अनुमान कहाँ बलवान्‌ देखा गया जिसके बल से प्रधान, परमाणु आदि कारणों की सिद्धि होगी, यह अर्थ है