Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 29
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हिन्दी अर्थ
अतएव जीव भी ब्रह्म के पर्यायरूप ही हैं, ऐसा कहते है।
हे ज्ञानवानों मे श्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी, चिद्व्योम, ब्रह्म, चिन्मात्र, आत्मा, चिति, महान्, परमात्मा
इन सबको आप पर्यायवाची जानिये