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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अत्रैव मे पुरा प्रोक्तं मत्पित्रा पद्मजन्मना । पद्मरेणुमताख्यानं श्रृणु तत्कथयामि ते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाशभूत चिदाकाशात्मा के स्फुरण की सृष्टिरूपधारिणी पृथिवी आदि कल्पना की गई है तथा मन, बुद्धि आदिरूप कल्पना की गई है