Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 71
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हिन्दी अर्थ
जैसे कारण के अभाव से (शुक्रास्त, शुक्रोदयआदि कारण न होने से)
वायु, स्पंदन और उनसे होनेवाले मेघसेन्य शान्त हो जाते हैं वैसे ही बोध से चित्त, दृश्य ओर शरीर
तीनों निवृत हो जाते हैं