Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 73
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हिन्दी अर्थ
यदि कोड कहे कि केवल पढ़ने मात्र से इसका सकल अर्थ कैसे अवगत होगा 2 इस पर कहते है ।
यदि पदपदार्थ ज्ञानवान् पुरुष वीच में ही थककर इसके पढ़ने से विरत न हो तो पहले पहले
समझ मेँ न आया हुआ (अबुद्ध) ग्रन्थ का उत्तर ग्रन्थ से (आगे के ग्रन्थ से) बोध होता हे