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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 75

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 75

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इसलिए इस महाशास्त्र से दो भागों का (पूर्व ओर उत्तर दो भागों का) अथवा एक भाग का (आधे ग्रन्थ का) अपनी शक्ति के अनुसार अनुशीलन करना चाहिये । उससे अवश्य दुःख की निवृत्ति होगी