Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 178, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 178, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 178 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
पद्मजाधिष्ठिताशेषजगद्धारणया स्थिताः ।
भवामः पद्मजोपेतं जगद्रूपमविघ्नतः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे निर्मल वायु में स्पन्दन, आवर्त, विवर्त आदि भासते हैं वैसे ही ब्रह्मरूपी वायु में
सृष्टिरूपी स्पन्द भासता है