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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 178, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 178, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 178 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तत्र संवेदनं नाम यदिदं चन्द्रमण्डले । इतः पतत्यप्रतिघं तत्सर्वेणानुभूयते ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

शरीर में परिव्राजक की “शव' बुद्धि, कामी पुरुष की "कामिनी" बुद्धि और कुत्ते की "भक्ष्य" बुद्धि यों तीन विडम्बनाएँ होती हैं