Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 178, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 178, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 178 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
कः प्राणमारुतः क्षोभं जनयत्याशयस्थितः ।
प्रवेशनिर्गममयं कथं वा वद मे प्रभो ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव वास्तविक दृष्टि से अकारण पदार्थता और कल्पना दुष्ट से सकारण
पदार्थता दोनों का ही ब्रह्य में अविरोध से अस्तित्व है, क्योंकि वह सर्वशक्ति स्वरूप हे